Wednesday, August 10, 2022

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पल भर में लाखों-करोड़ों मौतें, हिल जाएगा प्रकृति का पूरा सिस्टम, अगर दुनिया में न्यूक्लियर वॉर हुआ तो क्या होगा?

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nuclear weapons : रूस और यूक्रेन के बीच हो रही जंग के बीच दुनिया पर परमाणु युद्ध का खतरा मंडरा रहा है. हलाकि लड़ाई लगभग अपने अंतिम दौर में है लेकिन इस खतरों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

nuclear weapons : सोचिये जरा आप अपने घर के ड्राइंग रूम में बैठे हैं और अचानक से ही एक तेज धमाका सुनाई दे और देखते ही देखते शरीर पर की खाल जलकर गिरने लगे, चारों तरफ बस धुआं भर जाए…हर तरफ चीख-पुकार तक का भी समय न मिले. करोड़ों लोग पल भर में ही मौत के आगोश में चले जाएं. खाने को रोटी न हो…लोग आपकी  आंखों के सामने मर रहे हों और बचाने का कोई जरिया न हो.
ऊपर शब्दों में बयां किया गया ये मंजर इससे  भी ज्यादा भयानक होगा अगर दुनिया में परमाणु युद्ध छिड़ गया तो. आज से करीब 77 साल पहले जब परमाणु बम जापान के दो शहरों पर गिरे थे, तो उस वक़्त  मौत का तांडव पूरी दुनिया ने देखा था. हजारों-लाखों लोग अपनों के सामने दुनिया छोड़कर चले गए थे और जो बचे उन्हें ऐसी बीमारियों ने घेरा कि मौत जिंदगी से ज्यादा प्यारी लगने लगे.

Also Read..यूक्रेन के राष्ट्रपति का बंकर से इंटरव्यू : वोल्दोमिर जेलेंस्की बोले- शांति वार्ता के नाम पर वक्त बर्बाद कर रहे पुतिन, बाइडेन लें अब कोई बड़ा फैसला

रूस और यूक्रेन के बीच हो रही जंग के बीच दुनिया पर परमाणु युद्ध का खतरा मंडरा रहा है. हलाकि लड़ाई लगभग अपने अंतिम दौर में है लेकिन खतरों को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता. रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने परमाणु दस्तों को अलर्ट रहने के आदेश ने लोगों की धड़कनें और बढ़ा दी हैं.  ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि अगर परमाणु हमला हुआ तो दुनिया के साथ-साथ पर्यावरण पर इसका क्या असर पड़ेगा?
  • एक्सपर्ट्स का मानना हैं कि अगर ‘लिमिटेड’ न्यूक्लियर वॉर हुआ, तो भी करोड़ों लोग मौत की नींद सो जाएंगे. परमाणु हमले के बाद जो हालात पैदा होंगे उससे  पर्यावरण में बदलाव और बीमारियां, उनसे करोड़ों लोग और मारे जाएंगे.
  • परमाणु हमले के कारण धरती के स्ट्रोस्फेयर का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाएगा क्योंकि चारों तरफ धुआं फैल जाएगा और सूरज की रोशनी नहीं फैल पाएगी.
  • गर्म स्ट्रोस्फेयर के कारण धरती को रेडिएशन की किरणों से बचाने वाली ओजोन लेयर कैमिकल रिएक्शन से तबाह हो जाएगी.
  • मध्य अक्षांश के ऊपर अल्ट्रावॉयलेट लाइट की रेंज 30 प्रतिशत से बढ़कर 80 प्रतिशत हो जाएगी, जिससे लोगों की जिंदगी, खेती और पानी में रहने वाले जानवरों को बेतहाशा नुकसान पहुंचेगा.
  • परमाणु हमले का दर्द लोग ही नहीं प्रकृति भी झेलेगी. दुनिया भर में जो बारिश होती है, उसमें तेजी से गिरावट होगी और मॉनसून का पैटर्न भी बिगड़ जाएगा. भयंकर सूखा पड़ेगा, जिससे फसलें नहीं पनप पाएंगी और करोड़ों-अरबों लोग भूख से मारे जाएंगे.
क्या हुआ था जब हिरोशिमा पर गिरा था परमाणु बम
रिपोर्ट्स की मने तो जब हिरोशिमा पर परमाणु बम गिरा तो उसकी 30 प्रतिशत आबादी (70-80 हजार लोग) पलभर में मारे गए और बाकी 70 हजार घायल हो गए. अनुमान ये भी लगाया जाता है कि 20 हजार जापानी मिलिट्री के सैनिक भी मारे गए थे. अमेरिका के सर्वे में सामने आया था कि शहर का 4.7 स्क्वेयर मील का क्षेत्रफल बर्बाद हो गया था. जापान के अधिकारियों के मुताबिक हिरोशिमा की 69 प्रतिशत इमारतें तबाह हो गईं. हिरोशिमा में 90 प्रतिशत डॉक्टर्स और 93 प्रतिशत नर्स मारे गए या घायलों में शामिल थे.
वहीं नागासाकी में हिरोशिमा से ज्यादा शक्तिशाली परमाणु बम गिराया गया था. लेकिन पहाड़ होने के कारण नागासाकी में रेडिएशन 6.7 किलोमीटर तक ही फैली थी. फिर भी हजारों लोग इस हमले में मारे गए. बताया जाता है कि जापान के दोनों शहरों के परमाणु हमले में 2 लाख से ज्यादा लोगों ने जान गंवाई थी.
किस देश के पास कितने परमाणु हथियार | Which country has how many nuclear weapons
रूस- 5977
अमेरिका-5428
चीन-350
फ्रांस-290
यूके-225
पाकिस्तान-165
भारत-160
इजरायल-90
उत्तर कोरिया-20
Tags:Vladimir Putin,Nuclear WarRussia, Ukraine War,atomic war
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